राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पर संकट, हार सकते है अनेक बड़े कांग्रेसी नेता
राजस्थान विधानसभा के चुनावी रण में सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस पार्टियां आमने-सामने है | 2013 में मिली 21 सीटों तक सिमट जाने वाले करारी हार के बाद से ही सत्ता से बेदखल चल रही कांग्रेस अपने आपको हर तरीके से सत्तर में वापस लाने के ललायित दिख रही है| राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट के युवा चेहरे और पूर्व सीएम अशोक गेहलोत के अनुभव के दम पर कांग्रेसी सोच रहे है उन्हें हर बार सत्ता बदले जाने की रीत के चलते जनता आशीर्वाद ज़रूर देगी लेकिन कांग्रेस पार्टी को भी वास्तविकता का एहसास हो चूका कि ज़मीनी हकीकत उसके अरमानो से मेल नहीं खाती है|
राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पर संकट, हार सकते है अनेक बड़े कांग्रेसी नेता
राजस्थान विधानसभा की कुल 200 सीटों पर 7 दिसंबर को वोटिंग होनी है| बहुमत पाने का करिश्माई आंकड़ा 101 है| इस बार कुल 2,294 उम्मीदवारों का फैसला 12 दिसंबर को मतगणना वाले दिन हो जायेगा| एग्जिट पोल्स के सहारे झूठे आत्मविश्वास से फुदक रही कांग्रेस पार्टी को जमीन पर आम जनता द्वारा भाजपा को मिल रहा घोर समर्थन मानो जैसे नज़र ही नहीं आ रहा|
राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के अपनी ही निम्नलिखित अंदरूनी कारणों के चलते उसके ऊपर हार का संकट लहराता दिख रहा है जिसमें उसके बड़े-बड़े नेता हारने की ओर दिख रहे है| यह है वह बड़ी वजहें जिसके कारण कांग्रेस पार्टी शायद नहीं कर पायेगी राजस्थान का रण विजय|
1 –सीएम चेहरा साफ़ नहीं
राज्य भर में हुए तमाम सर्वेस में साबित हो चुका है कि हर उम्मीदवार के लिए मायने रखने वाली पहली बात है मुख्यमंत्री का चेहरा | जहाँ सत्ताधारी भाजपा ने सीएम वसुंधरा राजे के चेहरे के साथ जनता से पुनः जनादेश मांगने का प्रण किया तो वहीँ राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी हाई कमान अपने कन्फ्यूज्ड राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गाँधी की अगुवाई में प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट या पूर्व सीएम अशोक गहलोत को आगे करने के पशोपेश में पड़ गई और दोनों को चुनाव लड़वाते हुए अपना कोई चेहरा घोषित नहीं किया तो ऐसे में जनता किसके चेहरे पर वोट कर करे यह असमंजस आ खड़ी हुई है और यह कांग्रेस की जीत में सबसे रोड़ा बन सकता है|
2 –जातियों का गलत समीकरण
पूर्व सीएम अशोक गहलोत की समाज के एक पक्षी जातियों को जोड़ने की रणनीति ने कांग्रेस के परंपरागत वोटर्स को नाराज़ कर दिया जिससे उसके वोट बैंक का बैलेंस डाउन होना तय है| जहाँ जाट समाज उसे खफा है तो वहीँ मुस्लिम वोटर्स भी खुल कर उसके समर्थन में नहीं दिख रहा है| राजपूतो व ब्राह्मणो का सहयोग भी उसे मिल पायेगा इस पर भी सवालिया निशान है|
3 – पार्टी के पास फंड्स की रही कमी
राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस एक ज़माने में देश की सबसे बड़ी पार्टी रही है लेकिन कांग्रेस को राजस्थान में जनता से चुनाव लड़ने के लिए चंदा मांगना पड़ा जिससे साबित हो जाता है कि चुनाव लड़ने की उसकी कितनी सीमित क्षमता हो चुकी है जिसके कारण वह ढंग से न लड़ते हुए हार जाएगी|
4 –दिग्गज जिनकी हार हो सकती है
राज्य चुनाव में दिग्गजों की बात की जाए तो बाड़मेर छोड़ झालरापालटन सीट पर सीएम वसुंधरा राजे का सामने करने उतरे मानवेन्द्र सिंह खुद अपनी जीत को लेकर सुनिश्चित नहीं है तो उनकी हार तय मानी जा रही है | दूसरी ओर टोंक सीट से लड़ रहे सचिन पायलट को मुस्लिम वोटर्स का गुस्सा देखने को मिल सकता है जो भाजपा उम्मीदवार यूनुस खान को जीतवा सकते है | इसी तरह मंत्री कालीचरण सराफ के सामने राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की अर्चना शर्मा पीछे दिख रही है| सरदारपुरा सीट पर भी गहलोत का प्रदेश की राजनीति से दूर रहने के कारण हार मिले तो कोई हैरानी नहीं होगी|
5- क्षत्रपों से नुक्सान
ऐसे तो प्रदेश में आम आदमी पार्टी , बसपा , माकपा , एनसीपी जैसे क्षेत्रीय पार्टियां भी चुनाव लड़ रही है लेकिन इनके सिमित सीटों पर चुनाव लड़ने के कारण राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोट बैंक में सेंधमारी होना तय है उसे सत्ता पाने में बेहद मुश्किल हो सकती है|
6 – अधिक मतदान तो नुक्सान कांग्रेस का
2014 से ही हुए राज्य चुनावों बढ़ते हुए मतदान का फायदा मिलने की जगह कांग्रेस को नुक्सान हुआ है इसलिए वह करीब 17 राज्यों में चुनाव हार चुकी है | 7 में से केवल 2 क्षेत्रों में बढ़त रखने वाली वाली कांग्रेस को अंतिम समय में नुक्सान हो सकता है|
7 –राहुल गाँधी पीएम मोदी के सामने बौने
राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गाँधी जानते है कि पीएम मोदी के आगे उनकी दाल नहीं गलने वाली इसलिए अपनी जुबां गन्दी कर मुफ्त में पीएम मोदी और भाजपा को उनपर हमला कर जनता में समर्थन बढ़ाने का मौका दे दिया है| जहाँ पीएम मोदी की रैलियां लाइव होती है तो वहीँ राहुल गाँधी के भाषण सोशल मीडिया पर वायरल होते है हँसाने के लिए |
इन सब कारणों से साफ़ है कि राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जीत की हवा से कोसो दूर है क्योंकि उसके साफ़ दृष्टि नहीं तो जनता को कैसा शासन दे पायेगी ? उसे वाकई में चमत्कार ही बचा सकता है वरना 5 साल का वनवास उसे मुबारक हो |
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Political Analyst and Commentator, Interested in Political Strategy, Election Campaigns and E-Governance Implementation.


